एक लक्कड़हारा था जो बहुत महेनती था वह हर रोज़ लकड़िया काट कर अपने सेठ को देता। सेठ उसे हर महिने २००० रुपये देता। वो अपने सेठ के साथ पिछले पाँच साल से काम कर रहा था, परंतु सेठ ने कभी उसका पगार नही बढ़ाया। उसने भी कभी नही कहा।

एक दिन सेठ ने दूसरे लकड़हारे को भी काम पर रख लिया। दो महीने मे सेठ ने उस नये लक्कडहारे का पगार बढ़ा दिया और अगले दो महीनो मे दोबारा बढ़ा दिया।

जब ये बात उसे पता चली तो तो गुस्से मे आकर वो सेठ के पास गया और कहाँ मे पिछले 5 सालो से आपके साथ काम कर रहा हूँ फिर भी मेरा पगार कभी नही बढ़ाया और उस नये लक्कडहारे का दो बार बढ़ा दिया। तो सेठ ने कहा वो ज़्यादा लकड़िया काँट के लाता है इसलिए बढ़ाया।

यह सुनकर उसने कहा अगर मे ज़्यादा लकड़िया लाउ तो मेरा पगार भी बढ़ा दोगे। सेठ ने कहा-” क्यो नहि”। अब उसने सोचा कि आज से वो रोज सुबह ४:०० बजे उठकर काम शुरु करेगा और देर रात तक करेगा।

और अगले दिन वैसे हि किया रात को जब सेठ के पास लकडिया पहुचाने गया तो पुछा आज किसने ज्यादा लकडिया काटी तो सेठ बोला नये लकडहारे ने। अगले दिन से और ज्यादा मेहनत करने लगा और रात को लौटते वक्त सेठ के पास जाता और वही सवाल पुछता । सेठ का जवाब भी नही बदलता।

ज़्यादा मेहनत करने से उसे फायदा तो हुआ पर वो उस नये लक्कडहारे जितनी लकड़िया नही काट पाता। एक दिन उसने सोचा कि उस नये लक्कड़हारे का पिछा करके पता लगाये कि वो लकडिया कैसे काटता है। अगले दिन वो नये लक्कड़ हारे का पिछा करता रहा।

उसने देखा की वो घर से 7:00 बजे निकलता है , एक-दो पेड़ काटने के बाद आराम से बैठता है और थोड़ी देर के बाद वापस काम शुरू कर देता। दोपहर को खाना खाने घर जाता है और एक-दो घंटे बाद हि वापस आता, शाम को भी जल्दी चला जाता है। 

यह देखकर उसने सोचा अाज उसकि तबियत खराब होगी इसलिए ज्यादा काम नहि किया कल दोबारा उसका पिछा करुंगा। अगले दिन भी उसने वहि देखा वो नया लक्कडहारा आराम से हि काम करता है और घर भी जल्दि चला जाता है।

वह उसके पास गया और कहा भाइ तुम इतना धीरे धीरे काम करते हो, एक पेड़ काटने के बाद आराम से बैठते हो लेकिन मे तो बिल्कुल आराम नही करता, दिन रात महेनत करता हुँ, सुबह तुमसे पहले काम शुरू कर देता हू और देर रात तक करता रहता हू फिर भी मुज़से ज़्यादा लकड़िया कैसे काट लेते हो।

यह सुन कर वह बोला तुमने मुझे आराम करते हुए तो देखा पर ये नही देखा की एक-दो पेड़ कांटने के बाद मैं अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज करता हूँ। और फिर पूँछा तुमने आखरी बार कुल्हाड़ी की धार कब तेज की थी। तब उसे समझ मे अाया मेहनत के साथ कुल्हाडी कि धार भी तेज करनी होती है।
 
मोरल :- मेहनत करने से फायदा होता है इस बात मे दो मत नही परंतु काम को कैसे बेहतर तरीके से किया जा सके उस पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए। आप जिस भी फिल्ड मे हो काम बेहतर तरीके से करने के लिए factors (वजहो) को पहचानो और उनकी धार तेज करो। जैसे नये लक्कडहारे ने किया……

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