किसान और जमिंदार

एक किसान था जो बहुत मेहनती था उसने रात-दिन मेहनत करके दो सौ सोने के सिक्के इकट्ठा किए । किसान के खेत के पास एक तालाब था जिसका मालिक एक जमिंदार था । किसान ने सोचा अगर वो इस तालाब को खरिद ले तो उसे बहुत फायदा होगा और वो अपना पानी बाकि किसानो को बेच भी सकता है । जमिंदार भी वो तालाब बेचना चाहता था उसने पहले भी एक बार किसान से इस बारे मे बात कि थी । किसान जमिंदार के पास गया और पु्रे दो सौ सोने के सिक्के देकर तालाब खरीद लिया । किसान ने पुरे गाव मे घोषणा करवा दि कि यदि किसी को अपने खेतो के लिये पानी चाहिए तो वो उपलब्ध करवायेगा । परंतु किसान जब अपने तालाब मे से पानी निकालने के लिए नहेर बनाने गया तब जमिंदार वहा आकर  बोला मेरा पानी क्यो चोरी कर रहे हो ? किसान ने कहा- आपका कैसे मैने आपसे ये तालाब खरिद लिया है । जमिंदार ने कहा – तालाब खरिदा है पानी नहि इस पानी पर सिर्फ मेरा अधिकार है । दोनो के बिच बहस हुइ और मामला अकबर के दरबार मे पहुँचा ।

जमिदार ने कहा – हमारी बात तालाब बेचने कि हुइ थी पानी नहि । 

किसान ने कहा – कोइ व्यक्ति खाली तालाब क्यो खरिदेगा ।

जमिंदार ने कहा – महाराज मैने अपना वचन पुरा किया है जो बात हुइ थी बिलकुल वैसे ही मैने तालाब बेचा । 

अकबर असमंजस मे पड गये क्योकि वचन के मुताबिक सिर्फ तालाब कि ही बात हुइ थी ।

अकबर ने बिरबल कि और देखा

बिरबल ने कहा – जमिंदार कि बात सही है अगर बात तालाब बेचने कि हुइ थी तो सिर्फ तालाब हि किसान को मिलेगा पानी पर जमिंदार का हि अधिकार रहेगा । यह सुनते हि पुरे राज दरबार मे हाहाकार मच गया सब ने कहा बिरबल एसा अन्याय कैसे कर सकते है ।

जमिंदार के मुख पर मुस्कान आ गइ और उसने बिरबल का धन्यवाद करते हुए कहा अाप जैसा बुद्धिमान और कोइ नहि । बिरबल ने आभार व्यक्त किया । बिरबल ने दोनो से कहा जल जमिंदार का है जमिंदार जिसे चाहे उसे बेच सकता है ।

जमिंदार और किसान दोनो ने कहा हुजुर जैसा आप कहे । किसान काफि दुखी हो गया परंतु कर भी क्या सकता था ।

बिरबल बोले – तालाब किसान का है । बिना किसान कि इजाजत के कोइ अपना जल उसमे नहि रख सकता और यदि कोइ उसमे जल या कोइ और चिज रखता है तो उसे किसान को किराया देना होगा । किसान जितना चाहे उतना किराया ले सकता है । जैसा किसान चाहे वैसा होगा यदि किसान इजाजत दे तो जमिंदार पानी रख सकता है और न दे तो अभी इसी समय जमिंदार को अपना पानी तालाब से निकालना पडेगा नहि तो १० साल का कारावास भी हो सकता है । 

जमिंदार के पैरो तले जमिन खिसक गयी उसने कहा – हुजुर माफ करे गलती हो गयी आज के बाद एसा कभी नहि होगा ।

बिरबल ने कहा आज से तालाब और पानी दोनो किसान के हुए और जमिंदार को २५ सोने के सिक्के किसान को वापस लौटाने पडेंगे या फिर १० साल कारावास मे रहना होगा जैसा जमिंदार चाहे ।

जमिंदार ने बिरबल और किसान दोनो से माफि माँगि और २५ सिक्के किसान को हुइ तकलिफ के बदले वापस दे दिये।

मोरल :- हर समस्या का समाधान होता है हमे सिर्फ उसे ढुढना होता है ।

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