एक राजा था जिसके शयनस्थान मे एक जूं रहेती थी वह राजा का रक्त पिकर जिवन व्यतीत करती। एक दिन एक खटमल भी वहा आ पहुँचा, उसे देखकर वह दुखी होकर बोली – “भाई खटमल, तुम अनुचित स्थान मे आये हो शीघ्र यहा से चले जाओ”। खटमल ने कहा – “घर मे आए शत्रु को भी कोई एसा नहीं कहता है, मे तो केवल भोजन कि इच्छा से यहा आया हुँ अकेले तुम हि राजा का रक्तपान करो ये तो मुनासिब नहि है”। 

जू ने कहा – “भाई खटमल मैं रक्तपान तभी करती हु जब राजा सो जाता है यदि राजा के जागते हुए रक्त पियोगे तो उसे पता चल जाएगा”।

खटमाल बोला- “जबतक तूम पहले राजाका रक्त नहीं पियोगि, तबतक मै नहीं पिउंगा”।

जू ने कहा- “तुम बडे चंचल स्वभाव के हो, तुम हम दोनो को मरवाओगे”।

खटमल ने कहा – “बहेन बस अाज एक बार राजा का रक्त पिकर मे चला जाउंगा, मैंने कभी किसी राजा का रक्त नही पिया और मे तुम्हे वचन देता हु जबतक तुम नहि कहोगी मे रक्त नहि पिउंगा”।

जू ने थोडी देर सोचा और फिर हाँ मे जवाब दिया।

कुछ वक्त बाद जैसे राजा वहा आकर सोया खटमल तुरंत गया और राजा का रक्त पिना शुरु कर दिया। राजा फटाक से उठा अौर बोला देखो तो यहा खटमल जरुर होगा जिसने मुझे काटा है। यह सुनते हि वह खटमल जल्दी से भाग गया और जू वही रह गयी। राज सेवको ने जब देखा तो उन्हे केवल जू नजर आइ और उसे मार डाला।

मोरल :- अच्छे बनो लोगो कि मदद करो परंतु जिनके स्वभाव के बारे मे न जानते हो उसे आश्रय न दे।

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