यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ।

समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते।।

अर्थात :- हे पुरुषोंमें श्रेष्ठ अर्जुन सुखदुःखमें सम रहनेवाले जिस धीर मनुष्यको ये मात्रास्पर्श (पदार्थ) व्यथा नहीं पहुँचाते वह अमर होनेमें समर्थ हो जाता है अर्थात् वह अमर हो जाता है।

एसा कहा जाता है कि : 

भगवत गीता का पाठ करने से, समझने से संसार कि सभी समस्याओ का समाधान मिल जाता है ।जो व्यक्ति हर रोज मन को मक्कम कर गीता का पाठ करता है उसे कामयाब होने से कोइ नहि रोक सकता।

क्या आप के घर मे भगवत गीता है यदि नहि है तो आप निचे दि गयी लिंक पे जाकर खरीद सकते है।

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