यह कहानी पंचतंत्र से ली गयी है

अल्पबुद्धि नाम का एक आदमी था, जो दिन रात मेहनत करके अपने परिवार का गुजारा चलाता। जब वह घर पर नहीं होता उसकी पीठ पीछे उसकी पत्नी से रोज एक आदमी मिलने आया करता था।

उसे कई बार अपनी पत्नी पर शक तो गया परंतु वह कह नहीं पाया कई बार उसने लोगों के मुंह से भी सुना था कि उसकी पत्नी का चरित्र ठीक नहीं है। एक दिन उसने अपनी पत्नी को रंगे हाथ पकड़ नहीं के लिए एक युक्ति सोची। काम से घर पहुंचने पर अपनी पत्नी से कहा :- “आज से 2 दिनों के लिए मैं बाहर जा रहा हूं तुम घर का ध्यान रखना”

उसकी पत्नी खुश हो गई सोचने लगी -“उसके जाने के बाद वह रंगरेलिया मनाएगी।”

अल्प बुद्धि ने अपनी पत्नी से रास्ते के लिए खाना बनाने के लिए भी कहा ताकि उसे पूरा विश्वास हो जाए  उसकी पत्नी ने जल्दी जल्दी खाना बनाकर एक थैले में डाल दिया।

अल्प बुद्धि थैला लेकर घर से निकल गया उसकी पत्नी यह देख रही थी जब वह काफी दूर निकल गया तो उसने दरवाजा बंद कर दिया। अल्प बुद्धि भी गांव का चक्कर लगाकर चुपचाप अपने घर की दीवाल कूदकर अपने कमरे के चारपाई के नीचे छुप गया। 

घर का पूरा काम करने के बाद उसकी पत्नी उसी चारपाई के ऊपर आकर सो गई अंधेरा होने पर उसका आशिक खिड़की के रास्ता आया।

उसे देख वह चारपाई से नीचे उतरी तो उसका पैर किसी चीज से टकराया वह समझ गई कि उसका पति हि हो सकता है इसलिए उसने नाटक करना शुरु कर दिया। उसने अपने आशिक से कहा कि मैं एक सती हूं मैं केवल अपने पति के बारे में सोचती हूं तुम मुझे छूने की कोशिश मत करना।

तो उस व्यक्ति ने कहा तुमने ही तो मुझे बुलाया है , यह सुन उसने ने कहा की मैं मजबूर हूं तुम्हें यहा बुलाने के लिए क्योंकि आज से 15 दिन पहले जब मैं मंदिर गई थी तो भगवान ने मुझे दर्शन दिए थे और मुझसे कहा था कि 1 महीने के भीतर मेरे पति की मृत्यु हो जाएगी इसलिए मैं काफी डर गई थी।

मैंने भगवान से पूछा कि मुझे अपने पति को बचाने के लिए जो भी करना पड़े मे करूँगी तब भगवान ने मुझसे कहा कि तुम बहुत पवित्र हो तुम्हारी पवित्रता की वजह से ही तुम्हारे पति की मृत्यु होने जा रही है यदि तुम किसी पराए पुरुष के साथ संबंध बनाओगी तो तुम अपवित्र हो जाओगी, जिससे तुम्हारे पति की जान बच सकती है इसलिए मुझ सती को तुम्हे बुलाना पड़ा। अल्प बुद्धि यह सुनकर बहुत पछताया,  मन ही मन अपने आप को कोशने लगा,उसे अपने आप पर शर्म आ रहि थी की उसने अपनी पत्नी पर सक किया परंतु मन ही मन बहुत खुश हुआ क्योकि उसकी पत्नी उसे बचाने के लिए अपना सब कुछ दे सकती है।  वह जल्दी से बाहर निकला, उसकी आँखो मे ख़ुसी के आँसू थे उसने बाहर निकलते हि अपनी पत्नी को गले लगाकर कहा की उसने सब सुन लिया है और उसके चरित्र पर शंका करने के कारण माफी भी माँगी।  उसके बाद उसने अपनी पत्नी से कहा की वह उस पर पुरुष के साथ संबंध बनाए ताकि वह खुद बच जाए। फिर क्या था वह आदमी उसके सामने ही उसकी पत्नी के साथ संभोग कर चला गया और ऐसा पंद्रह दिन तक चलता रहा। उसके बाद उस मूर्ख ने अपने पूरे परिवार और  पूरे गाव को अपनी पत्नी के सतीत्व की कहानी सुनाई।

इसलिए कहा जाता है मूर्ख व्यक्ति समझाने से तुरंत समझ जाता है।

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पंचतंत्र की शिक्षा को ग्रहण करने वाला व्यक्ति हमेशा विजयी होता है। आज पंचतंत्र कई भाषाओ मे प्रचलित है पंचतंत्र की कहानियाँ इतनी रोचक है की एक बार पढ़ना शुरू करो तो रुकने का मन ही नही करता।  इन कहानियो मे Management और लोक व्‍यवहार का संपूर्ण ज्ञान मिलता है।

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