एक दिन एक साधू काशी जाने के लिए रवाना हुआ.  रास्ते में वह दोनों और देखता हुआ प्रकृति के सुंदर दृश्य का मजा ले रहा था. अचानक उसकी नजर एक लकड़हारे पर पड़ी जो कड़ी धूप में पसीने से लतपत होकर एक पेड़ का तना काट रहा था. 

यह देख कर ऐसा दो उस लकड़हारे के पास पहुंचे और उससे पूछा बेटा तुम क्या कर रहे हो. पसीने से  लतपत उस लकड़हारे ने गुस्से मे कहा भजिए तल रहा हूं. 

साधु ने कहा बेटा गुस्सा मत हो मैं यहां कुछ मांगने नहीं आया बल्कि तुम्हें एक ज्ञान की बात बताने आया हूं. 

लकड़हारे ने कहा बोलो क्या बोलना चाहते हो.
साधु ने कहा- जब तुम पेड़ काटने के लिए कुल्हाड़ी को झटका देते हो तो हमम् करके आवाज निकालते हो. यदि तुम जय श्री राम बोलोगे तो काम भी हो जाएगा और भक्ति भी. 

 दो घड़ी तक लकड़ हारा उस साधु को देखता रहा.

उसके बाद उसने कुल्हाड़ी साधु को पकड़ाइ और कहा यह लो आप करके दिखाओ. साधु ने कुल्हाड़ी ली और जोर से जय श्री राम कहते हुए पेड़ पर मारी. फिर उसने दोबारा जोर से जय श्री राम कहां और कुल्हाड़ी को पेड़ पर मारा. लगातार 8 से 10 बार ऐसा करने के बाद साधु ने फिर से कुल्हाड़ी उठाई और जोर से पेड़ पर मारा लेकिन इस बार उसके मुंह से हमम् निकला.

मोरल : लोगों को एडवाइस देना आसान है लेकिन उस पर अमल करना बहुत मुश्किल है.

तुम वही करो जो तुम्हारा काम है जिसका तुम्हें अनुभव नहीं उसमें अपनी टांग मत लड़ाओ. वरना तुम्हें भी इस साधु की तरह जलील होना पड़ेगा.

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